kuchh to uski behisi se mar ga.e | कुछ तो उसकी बेहिसी से मर गए

  - Shadab Asghar

कुछ तो उसकी बेहिसी से मर गए
और कुछ सादा दिली से मर गए

कुछ तो उसने लौट कर देखा नहीं
जो बचे थे मयकशी से मर गए

हम ने उसको देर तक देखा किया
और उस की सादगी से मर गए

दिल में अरमां और लब पर कुछ नहीं
हम तो ख़ुद की बुज़दिली से मर गए

अब फ़क़त सांसे बची है दोस्तों
हम तो कब का ज़िन्दगी से मर गए

  - Shadab Asghar

Saadgi Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Shadab Asghar

As you were reading Shayari by Shadab Asghar

Similar Writers

our suggestion based on Shadab Asghar

Similar Moods

As you were reading Saadgi Shayari Shayari