यक़ीं मानो कि मैं तन्हा नहीं हूँ
मैं उस के पास हूँ उस का नहीं हूँ
यही बस इक गिला है ज़िन्दगी से
तुम्हारे ख़्वाब की दुनिया नहीं हूँ
बता तू क्यूँ नहीं सुनता है मेरी
ख़ुदा क्या मैं तेरा बंदा नहीं हूँ
कहा उस ने तो मुझ को होश आया
मैं दुनिया में हूँ पर दुनिया नहीं हूँ
ख़मोशी चीखना अब बंद कर दे
तुझे सुनता हूँ मैं बहरा नहीं हूँ
— Amrendra Vishwakarma















