मेरे सब ग़म उदासी दर्द घबराहट को चू
में है
वो माथे से परेशानी की हर सिलवट को चू
में है
सदा सुन कर तुम्हारे आने की यूँँ झूम उठती है
सो पगली जा के दरवाज़े की हर खट खट को चू
में है
तुम्हारे क़दमों को जब चूमती हूँ लगता है ऐसा
कोई जोगन किसी दरग़ाह की चौखट को चू
में है
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