चौराहे पर बैठी बुढ़िया अम्न के नग़
में गाती है
और ग़रीबी धूप में उस को सारा दिन झुलसाती है
भाई चारे की बातें भी होती रहती हैं अक्सर
हिन्दू मुस्लिम के चक्कर में आग लगा दी जाती है
कट्टरता की आग में सब से पहले अपने जलते हैं
कट्टरता ही गाँधी जैसों पर गोली चलवाती है
एक तवायफ़ अपने कमरे के शीशे पर सालों से
दुनिया एक जहन्नम है ये लिखती और मिटाती है
— Gaurav Singh















