जो तेरे आस पास रहते हैं
वो भला क्यूँ उदास रहते हैं
आदमी लाख तन ढके लेकिन
साए तो बेलिबास रहते हैं
दिल भी आया तो ऐसी लड़की पर
जिस के पीछे पचास रहते हैं
हम उसे ख़्वाब भर में छूने से
सारा दिन बद-हवा से रहते हैं
याद रखना कि तेरे लोगों में
मेरे कुछ रू शनास रहते हैं
ज़िंदगी-मौत एक कमरे में
आजकल पास पास रहते हैं
— Gaurav Singh















