“औरत”

दुनिया क्या है
इक औरत है
फिर ये धरती
गोद है उस की
चाँद सितारे
उस के साथी
आसमान फिर
घर हो शायद
बारिश क्या है
उस के आँसू
पतझड़ क्या है
उस के दुख हैं
झीलें क्या हैं
दिल है शायद
पानी क्या है
उस की ममता
फसलें पौधे
औलादें हैं
फूल-परिन्दें
ये भी शायद
तेज हवाएँ
बहनें होंगी
हम सब क्या हैं
बुरा वक़्त हैं
बुरा वक़्त हैं
टल जाएँगे
फिर ये औरत
बच जाएगी

— Gaurav Singh

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