ग़ैर के साथ वो नज़र आया
अश्क आँखों से फिर उतर आया
साक़ी मुझ को शराब मत देना
आज जी पी के मेरा भर आया
थक गई आँखें रास्ता तकते
लौट के वो न उम्र भर आया
पी थी जिस को भुलाने की ख़ातिर
याद वो मुझ को रात भर आया
बा'द तेरे न कुछ सुना मैं ने
बा'द तेरे न कुछ नज़र आया
— Gulfam Ajmeri















