dil men yaadon ko ham is tarha sanjo lete hain | दिल में यादों को हम इस तरहा संजो लेते हैं

  - Hasan Raqim

दिल में यादों को हम इस तरहा संजो लेते हैं
जैसे गौहर को वो ज़ुल्फ़ों में पिरो लेते हैं

मैं भी कहता मुझे लहरों ने डुबोया है मगर
अपनी कश्ती को तो अपने भी डुबो लेते हैं

तुझको खोने की जो बात आई है ज़हन में मेरे
आज रोने की ये बात आई है, रो लेते हैं

जाने कैसे वो नहीं जानते कुछ भी "राक़िम"
जाने कैसे वो किसी और के हो लेते हैं

  - Hasan Raqim

Dil Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Hasan Raqim

As you were reading Shayari by Hasan Raqim

Similar Writers

our suggestion based on Hasan Raqim

Similar Moods

As you were reading Dil Shayari Shayari