मुझे ये ग़म है कि मैं अपना 'इश्क़ पा नहीं सका
और उसपे ये सितम कि तुझ सेे दूर जा नहीं सका
वो मेरे दिल में अपनी आरज़ू की लौ जला गया
मैं चाहते हुए भी ये दीये बुझा नहीं सका
फ़क़त वो एक फूल अपनी डाल से जुदा हुआ,
फिर उसके बाद सारा बाग़ मुस्कुरा नहीं सका
वो शख़्स मुझको भूल भी गया है, मैं मगर उसे
तमाम कोशिशों के बाद भी भुला नहीं सका
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