kisi ko yaad kar luun aisi hasrat hi nahin hoti | किसी को याद कर लूँ ऐसी हसरत ही नहीं होती

  - AYUSH SONI

किसी को याद कर लूँ ऐसी हसरत ही नहीं होती
मेरी अब 'इश्क़ करने की तबीअत ही नहीं होती

कि तुमने भी बहुत से वादे तोड़े पाँच सालों में
यहाँ इक मैं हूँ जिस सेे ये सियासत ही नहीं होती

यूँँ अरसों बाद मिलकर पूछते हो हाल तुम, मेरा
अगर तुम साथ होते तो ये हालत ही नहीं होती

ज़माने ने दिए है लाख दर्द-ओ-ग़म मुझे ऐसे
मुझे अब रात भर अश्क़ों की क़िल्लत ही नहीं होती

कभी दो झूठ बोले थे मेरे माँ बाप से मैंने
तभी से अब तलक मिलने की हिम्मत ही नहीं होती

मेरे यारों मेरी मसरूफ़ियत पर क्या गिला करना
मैं ख़ुद से भी नहीं मिलता, कि फ़ुर्सत ही नहीं होती

  - AYUSH SONI

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