"दोस्त की ख़्वाहिश"
मैं एक ऐसा दोस्त चाहता हूँ
जो सिर्फ़ दोस्त हो
न बहुत ज़ियादा अच्छा
न बहुत ज़ियादा बुरा
न ही उस
में हम हो
न वो किसी से कम हो
जिस से एक पल बात न करूँ
तो ऐसी एक बेचैनी होने लगे
जैसे नमाज़ियों को
एक वक़्त की नमाज़ छूट जाने पे होती है
जैसे एक भक्त को
भगवान की आरती छूट जाने पे होती है
जैसे ही उस का कॉल आए
तो ऐसा सुकून महसूस हो जैसे
परदेस से कई सालों बा'द
बेटे के घर आने पर माँ को होता है
मैं ऐसा दोस्त चाहता हूँ
जो मेरे पास बैठे तो
ऐसा लगे जैसे मेरे साथ
पूरी की पूरी दुनिया बैठी हो
— Irshad Siddique "Shibu"















