एक तो वो शराब दे रहे हैंऔर फिर बे हिसाब दे रहे हैंमेरे साक़ी ने मुँह बना के कहाथोड़ा ठहरो जनाब दे रहे हैंमेरी हिम्मत भी पस्त हो रही हैमेरे घुटने जवाब दे रहे हैंशौक़ मेरा मुझे ले डूबेगाइक बला को गुलाब दे रहे हैंइतने अच्छे भी लोग होते हैं क्यासंग मय के शबाब दे रहे हैं— jaani Aggarwal taak