ज़िन्दगी जीत है, हार हरगिज़ नहींफूल का भी ये श्रृंगार हरगिज़ नहींदर्द हो या भले पीर पर्वत-सी होमौत है हम को स्वीकार हरगिज़ नहीं— Janib Vishal