दोस्ती में सज़ा की तमन्ना न कर
मेरे ज़ख़्मों का इतना तमाशा न कर
मैं अगर गिर गया हूँ बहुत ज़ोर से
तूने मुझ को गिराया है दावा न कर
कल मिले थे गले भी लगे थे सनम
सुब्ह होते ही फिर से तक़ाज़ा न कर
आज साया है कल धूप होगी वहाँ
अपने साए का ऐसा तमाशा न कर
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