तू नहीं है तो सफ़र में कुछ कमी सी हो गई हैकिस तरफ़ जाएँ कि मंज़िल अजनबी सी हो गई हैचलते चलते याद तेरी आई तो ऐसा हुआ हैजो भी वीरानी थी उस में दिलकशी सी हो गई है— Meem Alif Shaz