गुमाँ है इस क़दर ग़ाफ़िल हमारा
नहीं कोई हुनर कामिल हमारा
ये दुनिया भी मुझे जैसे जुआ है
नहीं भरता है जिस से दिल हमारा
तड़पता है हमारे वास्ते भी
चलो कोई तो है बिस्मिल हमारा
हमें किस सम्त जाना है बता दो
फिरे है दर-ब-दर साहिल हमारा
लड़ाई में हमें ही हारना था
मुक़ाबिल ज़ेहन पर था दिल हमारा
यही लम्हा जिसे हम जी रहे हैं
यही लम्हा है मुस्तक़बिल हमारा
तेरी तस्वीर में हम भी दिखेंगे
तुम्हारा रंग है हामिल हमारा
हमेशा हम तकल्लुफ़ क्यूँ उठाएँ
कभी मलबूस तू भी सिल हमारा
किसी को दे दिया था हम ने सब कुछ
किसी पर आ गया था दिल हमारा
— Kaif Uddin Khan















