मेरे कभी हुए नइँ देखो कमाल तो है
मुझ से जुदा रहोगे अच्छा ख़याल तो है
पिंजरा भला हमें कैसे क़ैद में रखेगा
सारा जहाँ हमारा मानिंद जाल तो है
चाहत जिसे रही तेरी शख़्स वो नहीं अब
जो है ये शख़्स क्यूँ है तेरा सवाल तो है
यादें अभी हैं जाने के बा'द भी यहाँ पर
तू तो चला गया पर तेरा रूमाल तो है
— Kajiimran















