कहकशाँ और चाँद तारे सब चलें बारात में
आज शादी है यहाँ जुगुनू की देखो रात में
दोस्त हम मासूम दिल के लोग पीछे रह गए
क्योंकि इक धोखा न शामिल हो सका इस ज़ात में
इश्क़ मंज़िल पर मुसाफ़िर क़ैद कर लेगा तुझे
माफ़ करना पर मुकम्मल जीत तो है मात में
क्या है जादू पास उस के जानता मैं भी नहीं
जो कहे सच झूठ आ जाता हूँ उस की बात में
— Kajiimran















