मुझ को इज़हार-ए-मुहब्बत न दुआ आती है
और पहल करने में तुम को भी हया आती है
उस को मालूम नहीं उस की अदा का जादू
मुस्कुरा दे वो तो उम्मीद-ए-शिफ़ा आती है
बातों बातों में वो रख देती है हाथों पे हाथ
दिल चुराने की उसे सारी कला आती है
इस लिए भी मैं हमा-वक़्त बड़ा हँसता हूँ
क़हक़हे से मेरे उस की भी सदा आती है
— Kartik tripathi















