हम को आता ही नहीं दिल को दुखाना ख़ालिद
चाहे जितना ये बदल जाए ज़माना ख़ालिद
कुछ नया तुम जो अगर ढूँढे तो थक जाओगे
अब तलक मुझ में बसा है वो पुराना ख़ालिद
जान पे आई तभी मुझको समझ आया है
हाए मुश्किल है बहुत दिल का लगाना ख़ालिद
वो कहाँ जाए करे क्या ये बता दे कोई
जिन का होता ही नहीं कोई ठिकाना ख़ालिद
'इश्क़ बस तेरा मुझे सच्चा नज़र आता है
झूठ का लगता है बाक़ी सब फ़साना ख़ालिद
तू नहीं समझा वगरना ये जहाँ वाले तो
सब से कहते हैं कि तेरा है दिवाना ख़ालिद
मौत आसां सी बहुत लगने लगी है मुझको
अब तो मुश्किल भी हुआ ख़ुद से निभाना ख़ालिद
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