ham ko aata hi nahin dil ko dukhaana khaalid | हम को आता ही नहीं दिल को दुखाना ख़ालिद

  - Khalid Azad

हम को आता ही नहीं दिल को दुखाना ख़ालिद
चाहे जितना ये बदल जाए ज़माना ख़ालिद

कुछ नया तुम जो अगर ढूँढे तो थक जाओगे
अब तलक मुझ में बसा है वो पुराना ख़ालिद

जान पे आई तभी मुझको समझ आया है
हाए मुश्किल है बहुत दिल का लगाना ख़ालिद

वो कहाँ जाए करे क्या ये बता दे कोई
जिन का होता ही नहीं कोई ठिकाना ख़ालिद
'इश्क़ बस तेरा मुझे सच्चा नज़र आता है
झूठ का लगता है बाक़ी सब फ़साना ख़ालिद

तू नहीं समझा वगरना ये जहाँ वाले तो
सब से कहते हैं कि तेरा है दिवाना ख़ालिद

मौत आसां सी बहुत लगने लगी है मुझको
अब तो मुश्किल भी हुआ ख़ुद से निभाना ख़ालिद

  - Khalid Azad

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