कितना अंजान था इस काम से पहले पहले
मैं था गुमनाम तेरे दाम से पहले पहले
अब तो हम देख उसे राह बदल लेते हैं
था जो मशहूर मेरे नाम से पहले पहले
उसको आगाज़-ए-सफ़र से ही पशेमां देखा
वो पलट आएगा अंजाम से पहले पहले
ऐ परिंदों कभी रातों का भरोसा न करो
तुम तो घर लौट चलो शाम से पहले पहले
मैं तुम्हें सोच के तन्हाई में रो लेता हूँ
ये मेरा काम है बस जाम से पहले पहले
कितनी मुश्किल से तेरे दिल में उतर पाया हूँ
इक निशां तक भी नहीं गाम से पहले पहले
रात गुज़री तो कहीं चैन मिला है मुझको
कितना बेचैन था इल्हाम से पहले पहले
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