kirdaar meraa ab ye kahaanii men marega | किरदार मेरा अब ये कहानी में मरेगा

  - Khalid Azad

किरदार मेरा अब ये कहानी में मरेगा
अफ़सोस यही है कि जवानी में मरेगा

जो मौज-तलातुम से निकल आया है बचकर
कैसे वो तेरे आँख के पानी में मरेगा

मुद्दत हुई लेकिन अभी भूला नहीं तुझको
ये दिल भी तेरी याद-दहानी में मरेगा

थे प्यासे मगर हाथ लगाया नहीं उसने
दरिया इसी को सोच के पानी में मरेगा

हो जायेगा उस बाप को ये सारा जहाँ बोझ
जिस बाप का बेटा यूँँ जवानी में मरेगा

इस दौर के रावन का बसेरा है सभी में
मुश्किल है कभी राम-कहानी में मरेगा

  - Khalid Azad

Aankhein Shayari

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