क्यूँ नहीं
मैं ग़म से पूछता
तेरा ख़ुशी से वास्ता क्यूँ नहीं
मोहब्बत भी है
दोनों का एक रास्ता क्यूँ नहीं
जुदा हो कर भी वो मुझ से
ख़ुश क्यूँ ना रहा
वो मुझे दूर कर भी
ख़ुद से क़रीब क्यूँ ना रहा
उलझा रहता था मेरी वजह से
अब मैं नहीं तो वो सुलझा क्यूँ नहीं
— Kohar















