न है उस की ख़्वाहिश न ही प्यार अब

नहीं मैं नहीं करता इज़हार अब

यहाँ हर कोई ख़ुश नज़र आता है
बदल ही गई क्या वो सरकार अब

मिरा देखना उस को फिर सोचना
नहीं है वो पहले सा क्यूँ यार अब

मोहब्बत ही तो बेचा करता है वो
मोहब्बत भी है एक व्यापार अब

वफ़ाएँ सिखाते थे मुझ को कभी
कहाँ हैं वो सारे वफ़ादार अब

मुझे उस के जाने का भी दुख नहीं
ये दिल हो गया है समझदार अब

— Krishan Kant Saini

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