ye sabhi jo khwaab hain in par nayan ka bojh hai | ये सभी जो ख़्वाब हैं इन पर नयन का बोझ है

  - Divya 'Kumar Sahab'

ये सभी जो ख़्वाब हैं इन पर नयन का बोझ है
फिर तुम्हारी आदतों पर आज मन का बोझ है

इस तरह से वो तुला था छोड़ जाने पर मुझे
आत्मा कहने लगी मुझ पर बदन का बोझ है

कह गए माता पिता से हो गई लड़की बड़ी
कान भाई के भरे घर पर बहन का बोझ है

जिस किसी के हाथ मजबूरी ने जुड़वाए यहाँ
आदमी के हाथ पर देखो नमन का बोझ है

जैसे ही अर्थी से पूछा साँस लेती क्यूँ नहीं
उठ के अर्थी ने कहा मुझ पर कफ़न का बोझ है

इस तरह से नैंन बरसे खेत सूखे देख कर
ये धरा कहने लगी इस पर गगन का बोझ है

  - Divya 'Kumar Sahab'

Romance Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Divya 'Kumar Sahab'

As you were reading Shayari by Divya 'Kumar Sahab'

Similar Writers

our suggestion based on Divya 'Kumar Sahab'

Similar Moods

As you were reading Romance Shayari Shayari