मेरा संसार

मेरे मन का सुकून भी तुम हो,
तुम ही मेरी मंज़िल
उस का जुनून भी तुम हो,
मेरा दिन भी तुम हो,
मेरी रात भी तुम हो,
मेरी नींद भी तुम हो,
मेरे जज़्बात भी तुम हो,
मेरा हर लम्हा तुम हो,
मेरे हालात भी तुम हो,

मेरा जीवन भी तुम हो,
इस की मस्ती भी तुम हो,
हूँ अगर मैं मँझधार तो,
फिर इस की कश्ती भी तुम हो,
अगर हूँ मैं शरीर तो,
इस की अस्थि भी तुम हो,
और हूँ अगर मैं आत्मा तो,
इस की मुक्ति भी तुम हो,
मेरा वैराग्य भी तुम हो,
मेरी आसक्ति भी तुम हो,
मेरा ईश्वर भी तुम हो,
मेरी भक्ति भी तुम हो,

मैं अगर दिल हूँ तो,
इस की धड़कन भी तुम हो,
मेरी हर बात तुम हो,
मेरी तड़पन भी तुम हो,
मेरी स्वतंत्रता भी तुम हो,
मेरा बंधन भी तुम हो,
मेरा सुख भी तुम हो,
मेरी मुस्कान भी तुम हो,
मेरा दुख भी तुम हो,
मेरा सम्मान भी तुम हो,
मेरा बल भी तुम हो,
मेरा स्वाभिमान भी तुम हो,
मेरी प्रार्थना भी तुम हो,
मेरा अभिमान भी तुम हो,
मेरा हर काम भी तुम हो,
थक जाऊँ तो आराम भी तुम हो,
भेजे हैं तुझ को चाँद के हाथों,
वो सारे पैग़ाम भी तुम हो,
साँसों में बस तेरा नाम है,
मेरा तो अंजाम भी तुम हो,

मेरा तो आधार ही तुम हो,
मेरी तो सरकार ही तुम हो,
मेरी तो फ़कीरी भी तुम हो,
ख़ज़ाने का अंबार भी तुम हो,
मेरे लबों का मौन भी तुम हो,
मेरे दिल की पुकार भी तुम हो,
मेरी तो कुटिया भी तुम हो,
मेरा राज-दरबार भी तुम हो,
मेरा हर विकार भी तुम हो,
मेरा तो श्रृंगार भी तुम हो,
मेरी जीत-हार भी तुम हो,
मेरा गुस्सा-प्यार भी तुम हो,
मेरा तो घर बार ही तुम हो,
जीने के आसार ही तुम हो,
कैसे मैं बताऊ तुझे,
तुम्हारे बिन मैं कुछ भी नहीं,
मेरा तो संसार ही तुम हो,
मेरा तो संसार ही तुम हो,
मेरा तो संसार ही तुम हो।

— Divya 'Kumar Sahab'

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