आख़िर प्यार रहेगा कब तक
मरते दम तक या मतलब तक
आँखों ने सब कुछ कह डाला
बात नहीं आई बस लब तक
इश्क़ तो मुद्दत से जारी है
आज ख़बर पहुँची साहब तक
पंडित मुल्ला और भिकारी
बेच रहे हैं सब मज़हब तक
कैसे-कैसे चोर उचक्के
आ पहुँचे हैं बज़्म-ए-अदब तक
ज़ुल्म न ऐसे हरगिज़ ढाओ
बात चली जाएगी रब तक
तब तक हम भी प्यार करेंगे
नील गगन क़ायम है जब तक
आह गरीबों की मत लेना
ले डूबेगी ये साहब तक
— Kumar Aryan















