थोड़ी सी रह गई थी कमी तालमेल में
सो आज आ गए हैं मुसीबत की जेल में
कुछ और करने की कहाँ मोहलत मिली कभी
'उम्रें गुज़ार दी गई हैं नून तेल में
अब तक किसी ने बात बताई नहीं मुझे
किस जुर्म में यूँ भेजा गया मुझ को जेल में
ताब इस की आज ला न सका गिद्ध भी 'कुमार'
इतनी कहाँ से आ गई क़ुव्वत गुलेल में
— Kumar Aryan















