ये न था कि हसीं नहीं थे हमबारहा बस हमीं नहीं थे हमज़िंदगानी हुई अदा ऐसेपीठ-पीछे यक़ीं नहीं थे हममुफ़्लिसी सब उड़ा गई मंज़िलयार हासिल कहीं नहीं थे हमइक क़ज़ा भी अता नहीं मुझ पेकिस-क़दर मह-जबीं नहीं थे हमनाज कह कर हुआ सही कामिलमर्द भी जा-नशीं नहीं थे हम— Kunu