बात हो हुस्न की तुम नज़र आते हो
तुम ज़माने में सब रंग भर आते हो
तुम अगर ये ज़बाँ अपनी खोलो यहाँ
हर्फ़ ग़ज़लों के ख़ुशबू से भर आते हो
ज़ुल्फ़ की छाँव में मैं ठहर जाऊँ गर
आप उलझन मेरी दूर कर आते हो
आप की आँख से गर मिला आँख दूँ
आप ख़्वाबों में ही रातभर आते हो
चल के रुकना यहाँ मुस्कुराना यहाँ
ऐसे रस्ते को कर के अमर आते हो
— Lalit Mohan Joshi















