एक लड़का है उसे रोना नहीं है
जेब है ख़ाली मगर बोला नहीं है
रोज़ रस्ता कटता तन्हा उसका यारो
साथ उसके कोई भी चलता नहीं है
वक़्त भी यारो ये कैसा आ गया है
घर कमाए पैसों से चलता नहीं है
वो करे तो क्या करे यारो यहाँ अब
वो मईशत के लिए सोता नहीं है
काम अपनों के लिए करने की आदत
उसने तो ख़ुद के लिए सोचा नहीं है
लोग तो बेकार बातें करते हैं अब
तल्ख़ बातों से तो फिर बचता नहीं है
चाँद पर अपना नहीं अब दिल लगाता
'इश्क़ में ज़ाया' समय करता नहीं है
अपने हिस्से के ग़मों में यार वो अब
ख़ुद के ग़म अब औरों को देता नहीं है
वो यहाँ डरता यक़ीनन हर किसी से
आँधियों से अब वो तो डरता नहीं है
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