हज़ारों ग़म तुम्हें लेकिन हमारा ग़म ज़ियादा है
हमें तो ख़ुद-कुशी करनी तुम्हारा क्या इरादा है
ग़ज़ब है खेल क़िस्मत का किसे कब क्या बना दे ये
कभी राजा रहा था वो वही जो अब पियादा है
वही लड़का ज़माने की नज़र में चोर होता था
वही लड़का अभी देखो बड़ा ही दिल कुशादा है
— Jaypratap chauhan















