रस्ता बनाया भीम ने
चलना सिखाया भीम ने
हर बंद दरवाजा खुला
जब खटखटाया भीम ने
हक के लिए सबके ही फिर
लड़कर दिखाया भीम ने
अन्याय पर तो रोष भी
खुलकर जताया भीम ने
सोए हुए थे जो दलित
उनको जगाया भीम ने
वो पीठ से चिपका हुआ
झाड़ू छुटाया भीम ने
लटका हुआ था जो गले में
मटका हटाया भीम ने
था जातियों का भूत जो
उसको भगाया भीम ने
आदम न समझा जिनको हक
उनको दिलाया भीम ने
औरत का भी सम्मान फिर
करना सिखाया भीम ने
मनुवाद से आज़ाद भी
हमको कराया भीम ने
विधि का विधाता दुनिया में
ख़ुद को बनाया भीम ने
जाते हुए फिर बुद्ध का
झण्डा उठाया भीम ने
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