hisse men mere ab to yuñ aam udaasi hai | हिस्से में मेरे अब तो यूँँ आम उदासी है

  - Monis faraz

हिस्से में मेरे अब तो यूँँ आम उदासी है
हर सिम्त अँधेरा है हर गाम उदासी है

बन बैठी है जो अब के मेहमान मेरे घर की
ख़ामोश सी लड़की है और नाम उदासी है

क्या तुझ को बताएँ हम फुरक़त में तेरी हमदम
हर सुब्ह मुसीबत है हर शाम उदासी है

कर दे जो इशारा तू आँखों से मेरी जानिब
ग़म्ज़े के तेरे आगे नाकाम उदासी है

हर शख़्स मुझे तन्हा यूँँ छोड़ गया मोनिस
जैसे कि मुहब्बत का इनआम उदासी है

  - Monis faraz

Ghar Shayari

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