जब तुम ने मेरा नाम पुकारा ख़ुशी ख़ुशी

मैं हो गया था तब से तुम्हारा ख़ुशी ख़ुशी

दरिया के जैसी तुम में नज़ाकत है इस लिए
दरिया में अपना पैर उतारा ख़ुशी ख़ुशी

चौबीस घंटे में से मुझे दे दो जितना भी
कर लूँगा उतने में ही गुज़ारा ख़ुशी ख़ुशी

माँगा तुम्हें ख़ुदा से तो उस वक़्त जान-ए-जाँ
टूटा फ़लक से एक सितारा ख़ुशी ख़ुशी

मुझ को है रहनुमा की ज़रूरत सो आज तुम
मेरा भी हाथ थाम लो यारा ख़ुशी ख़ुशी

बेहतर है उस के इश्क़ में फ़ुर्क़त न हो कभी
मैं इस लिए ही जंग में हारा ख़ुशी ख़ुशी

मैं ज़िन्दगी की मार से गिरने लगूँ अगर
तो यार मुझ को देना सहारा ख़ुशी ख़ुशी

जिस हुस्न को ग़ज़ल ये सुना दोगे तुम 'मुकेश'
हो जाएगा वो यार तुम्हारा ख़ुशी ख़ुशी

— Mukesh Jha

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