ऐसे मिलता है कि एहसान किया हो जैसे
और बिछड़ता है तो ऐसे कि हवा हो जैसे
है सुलूक उस का मेरी ओर ग़ुलामों जैसा
मैं उसे पूज रहा हूँ वो ख़ुदा हो जैसे
आग दिल में भी है और मेरे लबों पर भी है
ऐसे सिगरेट जलाई है दवा हो जैसे
एक भी लफ़्ज़ नहीं बोल रहा मिल के वो
साथ तो है मगर ऐसे कि मरा हो जैसे
अब कहीं जा के मुसव्विर ने है कुछ अर्ज़ किया
आख़िरी बार कोई शे'र कहा हो जैसे
— Maher painter 'Musavvir'















