तुम ने इतने तैश में दफ़्तर छोड़ा है
जैसे इक सैनिक ने लश्कर छोड़ा है
पागल लड़की ने मज़दूर के चक्कर में
देखो इक सरकारी अफ़सर छोड़ा है
उस ने इक मुस्कान भी दी थी जाते वक़्त
और अब अपनी बर्थ पे नंबर छोड़ा है
फिर से तुम्हें पसंद है कोई जाओ तुम
तुम ने यूँॅं ही मुझ को अक्सर छोड़ा है
जब भी किसी को चाहा पूरा चाहा था
जब छोड़ा है उस को यक्सर छोड़ा है
— Praveen Sharma SHAJAR















