उसकी बस्ती में इंसान आए हुए थे मैं क्या बात करता
उसने होठों पे ताले लगाए हुए थे मैं क्या बात करता
मैंने कोशिश बहुत की बहुत बरग़लाया मगर कुछ न बोली
उसने दुख सारे दिल में छुपाए हुए थे मैं क्या बात करता
वो अकेली जो मिलती तो लड़ता झगड़ता शिकायत भी होती
उसकी शादी थी मेहमान आए हुए थे मैं क्या बात करता
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