किसी की दीद करने से चलें किसी की चाह तक

  - Milan Gautam
किसीकीदीदकरनेसेचलेंकिसीकीचाहतक
मुवानसतकाहरसफ़ररुकाहुआहैबाहतक
जबीनचूमकरनसीबजोड़नेकीबातकर
जोहाथथामनाहैगरतोज़ीस्तकेनिबाहतक
हैलड़कियोंकोचाहिएकिलाएँसारेलड़कोंको
उदासियोंकीराहसेमोहब्बतोंकीराहतक
शराबऔरसदमोंकेतअल्लुक़ातगहरेहैं
अलमभुलानेजातेहोंगेलोगख़ानक़ाहतक
हमींसुकूँबिखेरतेरहेजहानभरमेंऔर
हमींनेखोलेहैंयेसारेरास्तेगुनाहतक
मोहब्बतेंहीकरतीहोंगीबे-ठिकानाआदमी
मोहब्बतेंहीलातीहोंगीआदमीपनाहतक
हमउसकोभूलाहीकहेंगेभूलकरकेभीअगर
सहरकाभूलालौटआएघरकोशाम-गाहतक
ख़यालोंकेसफ़रकीरह-नुमाईकीअरूज़ने
हरएकशे'रमेरामुझकोलायावाह-वाहतक
  - Milan Gautam
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