हर राह पर चलता हुआ हर कारवाँ आज़ाद है
अब ये ज़मीं आज़ाद है अब आसमाँ आज़ाद है
ख़ातिर वतन के मिट गईं लाखों-करोड़ों हस्तियाँ
जा कर कहीं फिर आज ये हिन्दोस्ताँ आज़ाद है
हैं सरहदों पर सैकड़ों वीरों ने दी क़ुर्बानियाँ
देखो तभी ये आज अपना आशियाँ आज़ाद है
— Prashant Prakhar















