बस मेरे यार ख़्वाब में आ जाए वो लड़की
मिलने चाहे हिजाब में आ जाए वो लड़की
लिखता हूँ ख़त ज़ेहन में आता है चेहरा उसका
लिख दूँ मैं गर किताब में आ जाए वो लड़की
यार लगेंगे जलने मुझ सेे गुलाब सी दिखती
मुफ़लिस के गर हिसाब में आ जाए वो लड़की
कर दूँगा विद्रोह मुहब्बत के हक में मैं भी
पंकज गर इंक़लाब में आ जाए वो लड़की
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