चल दर-ए-यार देखा जाएगा
छोड़ ये आर देखा जाएगा
इक दफ़ा कर ही लेते हैं उस के
हुस्न से प्यार देखा जाएगा
इतनी संजीदगी भी ठीक नहीं
चलिए सरकार देखा जाएगा
डाल कर आँख उस की आँखों में
कर दो इज़हार देखा जाएगा
फ़िल्म रोज़-ए-जज़ा चलेगी जब
सब का किरदार देखा जाएगा
मय की मिक़दार तो नहीं साक़ी
पर तिरा प्यार देखा जाएगा
बस बहुत सह लिए सितम 'ज़ामी'
उठा तलवार देखा जाएगा
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Parvez Zaami
our suggestion based on Parvez Zaami
As you were reading Zulm Shayari Shayari