सौ दोस्त तुम बना लो दो चार मत बनाओ
झगड़ा ज़रा सा है अब यलगार मत बनाओ
बच्चे हैं आज ये कल कुछ काम भी करेंगे
मज़दूर ही बना दो ग़द्दार मत बनाओ
ख़र्चा इलाज का कुछ ज़्यादा ही बढ़ गया है
सो लाश ही बना दो बीमार मत बनाओ
ताज़ा हवा तो आए कमरे में कुछ हमारे
खिड़की बना दो यारों दीवार मत बनाओ
मुझ को पसंद है मिट्टी चाहिए नहीं कुछ
मिट्टी में दफ़्न कर दो गुलज़ार मत बनाओ
— Piyush Mishra 'Aab'















