मोहब्बत जो समझ आने लगी है
उदासी नाचने गाने लगी है
उसे बस देख कर ख़ुश होता हूँ सो
वो अब तस्वीर से जाने लगी है
हुआ है सामना ऐसा किसी से
दग़ाबाज़ी भी शरमाने लगी है
मेरे होते हुए ऐसी नहीं थी
जो अब के जाम छलकाने लगी है
तो खेला इश्क़ में जाता है ऐसे
मुझे भी अक़्ल सी आने लगी है
— Amanpreet singh















