मुझ सेे पहले किसी से मिली आती हैवस्ल में हिज्र की ख़ुश्बू सी आती हैमैं बिछड़ कर दुखी हूँ तू ऐसा न सोचऐसे मौसम में तो शा'इरी आती है— Prit