"इस लिए"

हम जब जब मिले मैं ने तुम से
तुम्हारा कुछ कुछ चुरा लिया
कभी आँखों से नज़रिया चुरा लिया
तो कभी ज़बान से मिज़ाज चुरा लिया
या बदन की ख़ुशबू को चुरा लिया

हर बार और ज़्यादा
आकाश में तुम्हारे बनाए हुए आकार दिखने लगे
जब जब ख़ुद को सुना, सुना तुम को भी
तुम्हारे बदन की ख़ुशबू मुझे फूलों में मिलने लगी

और इसी तरह हर मुलाक़ात के बा'द
तुम हर वक़्त, हर लम्हा और ज़्यादा
मेरे पास रहने लगी

तुम ने पूछा था कि मैं तुम से
मिलने के बहाने क्यूँ ढूँढ़ता हूँ

— Pushkar Tripathi

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