दिल सभी के यहाँ कुचलते हुए
हम ने देखा है उस को चलते हुए
कितनी हसरत से मुझ को तकता है
रात भर इक चराग़ जलते हुए
उस ने नज़रों को मेरी देख लिया
अपने रुख़्सार पर टहलते हुए
— Ankit Raj
हम ने देखा है उस को चलते हुए
कितनी हसरत से मुझ को तकता है
रात भर इक चराग़ जलते हुए
उस ने नज़रों को मेरी देख लिया
अपने रुख़्सार पर टहलते हुए
Other ghazal from the same pen
Shers of good night.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling