"महबूब से गुहार"
भरोसा मैं तिरा करता रहूँ
तुझे ही बस यहाँ अपना कहूँ
कि आओ भी मिरे अब पास तुम
बनाओ भी मुझे अब ख़ास तुम
मुझे जीना तिरे ही साथ है
तुझी से तो मिरे दिन रात है
मुझे तेरा सहारा चाहिए
कि कश्ती को किनारा चाहिए
सुनो भी बात को मेरी सनम
तुझे ही चाहता अपनी क़सम
यहाँ कोई मुझे भाता नहीं
तिरे बिन अब रहा जाता नहीं
— Kaviraj " Madhukar"















