ha | हमें वो नींद में भी अब बुलाती है

  - Raunak Karn

हमें वो नींद में भी अब बुलाती है
सही में याद भी उसकी सताती है

गया है लग पता उसकी सहेली से
मुझे अपना सभी को वो बताती है

लिखे थे जो ग़ज़ल उसके लिए मैंने
सही में वो ग़ज़ल सबको सुनाती है

रुलाया है नहीं हमको किसी ग़म ने
हमें जितना सही में वो रुलाती है

नहीं थी तब उसे तकलीफ़ कोई भी
ख़ुशी तेरी यही बातें बताती है

कहाँ जाए किसे बोले तिरी बातें
शबिस्ताँ में तुझे क्या याद आती है

उतरता है यहाँ बादल मगर फिर भी
बिना बादल नयन ये भीग जाती है

गया था पास में उसके सही में कल
सही में वो मुझे अब भूल जाती है

  - Raunak Karn

Dard Shayari

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