तेरा नहीं होगा कभी मेरा नहीं होगा
ऐसे तो किसी तौर भी सौदा नहीं होगा
पल भर में सिमट जाएगी सदियों की मसाफ़त
पहले से नहीं सोचते होगा नहीं होगा
तन्हाइयों का देवता रातों का मसीहा
सोचा था किसी ने कभी तन्हा नहीं होगा
इस साल तेरी याद के बादल ही बहुत हैं
इस साल भी क्या गाँव में मेला नहीं होगा
— Rishabh Sharma















